Thursday, 12 July 2018

*रावण बनना भी कहां आसान....*

रावण में अहंकार था
तो पश्चाताप भी था

रावण में वासना थी
तो संयम भी था

रावण में सीता के अपहरण की ताकत थी
तो बिना सहमति परस्त्री को स्पर्श भी न करने का संकल्प भी था

सीता जीवित मिली ये राम की ही ताकत थी
पर पवित्र मिली ये रावण की भी मर्यादा थी

राम, तुम्हारे युग का रावण अच्छा था..
दस के दस चेहरे, सब "बाहर" रखता था...!!

महसूस किया है कभी
उस जलते हुए रावण का दुःख
जो सामने खड़ी भीड़ से
बारबार पूछ रहा था.....
*"तुम में से कोई राम है क्या ❓"*
😡

Sunday, 1 July 2018

नफरतों का असर देखो, जानवरों का बटंवारा हो गया, गाय हिन्दू हो गयी ; और बकरा मुसलमान हो गया.....

मालूम नही किसने लिखा है, पर क्या खूब लिखा है..
नफरतों का असर देखो,
जानवरों का बटंवारा हो गया,
गाय हिन्दू हो गयी ;
और बकरा मुसलमान हो गया.
मंदिरो मे हिंदू देखे,
मस्जिदो में मुसलमान,
शाम को जब मयखाने गया ;
तब जाकर दिखे इन्सान.
ये पेड़ ये पत्ते ये शाखें भी परेशान हो जाएं
अगर परिंदे भी हिन्दू और मुस्लमान हो जाएं
सूखे मेवे भी ये देख कर हैरान हो गए
न जाने कब नारियल हिन्दू औरखजूर मुसलमान हो गए..
न मस्जिद को जानते हैं , न शिवालों को जानते हैं
जो भूखे पेट होते हैं, वो सिर्फ निवालों को जानते हैं.
अंदाज ज़माने को खलता है.
की मेरा चिराग हवा के खिलाफ क्यों जलता है......
मैं अमन पसंद हूँ , मेरे शहर में दंगा रहने दो...
लाल और हरे में मत बांटो, मेरी छत पर तिरंगा रहने दो....
जिस तरह से धर्म मजहब के नाम पे हम रंगों को भी बांटते जा रहे है
कि हरा मुस्लिम का है
और लाल हिन्दू का रंग है
तो वो दिन दूर नही
जब सारी की सारी हरी सब्ज़ियाँ मुस्लिमों की हों जाएँगी
और
हिंदुओं के हिस्से बस टमाटर,गाजर और चुकुन्दर ही आएंगे!
अब ये समझ नहीं आ रहा कि ये तरबूज किसके हिस्से में आएगा ?
ये तो बेचारा ऊपर से मुस्लमान और अंदर से हिंदू ही रह जायेगा.......

Wednesday, 13 June 2018

तू खुद की खोज में निकल तू किस लिए हताश है,

तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है,
तू चल तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है
समय को भी तलाश है

जो तुझ से लिपटी बेड़ियाँ
समझ न इन को वस्त्र तू .. (x२)
ये बेड़ियां पिघाल के
बना ले इनको शस्त्र तू
बना ले इनको शस्त्र तू

तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है,
तू चल तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है
समय को भी तलाश है

चरित्र जब पवित्र है
तोह क्यों है ये दशा तेरी .. (x२)
ये पापियों को हक़ नहीं
की ले परीक्षा तेरी
की ले परीक्षा तेरी

तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है तू चल,
तेरे वजूद की समय को भी तलाश है
जला के भस्म कर उसे

जो क्रूरता का जाल है .. (x२)
तू आरती की लौ नहीं
तू क्रोध की मशाल है
तू क्रोध की मशाल है

तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है,
तू चल तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है
समय को भी तलाश है

चूनर उड़ा के ध्वज बना
गगन भी कपकाएगा .. (x२)
अगर तेरी चूनर गिरी
तोह एक भूकंप आएगा
तोह एक भूकंप आएगा

तू खुद की खोज में निकल
तू किस लिए हताश है,
तू चल तेरे वजूद की
समय को भी तलाश है
समय को भी तलाश है

Source: Pink Movie
by Mr. Amitabh Bachchan

Thursday, 7 June 2018

हम कबीर के वंशज चुप कैसे रहते !!"

"वो बोले दरबार लगाओ
वो बोले जय कारे लगाओ
वो बोले हम जितना बोलें
तुम केवल उतना दोहराओ
वाणी पर इतना अंकुश कैसे सहते
हम कबीर के वंशज चुप कैसे रहते !!"

नयन हमारे सीख रहे हैं हँसना झूठी बातों पर...

सूरज पर प्रतिबंध अनेकों
और भरोसा रातों पर
नयन हमारे सीख रहे हैं
हँसना झूठी बातों पर

हमने जीवन की चौसर पर
दाँव लगाए आँसू वाले
कुछ लोगों ने हर पल, हर दिन
मौके देखे, बदले पाले
हम शंकित सच पर अपने,
वे मुग्ध स्वयं की घातों पर
नयन हमारे सीख रहे हैं
हँसना झूठी बातों पर...

                     Dr. Kumar Vishwas

Wednesday, 23 May 2018

शब्द मुँह से छूट गया, शब्द न वापस आय.....

शब्द शब्द बहू अंतरा, शब्द के हाथ न पावं ।
एक शब्द करे औषधि, एक शब्द करे घाव ।।

शब्द सम्भाले बोलियेे, शब्द खीँचते ध्यान ।
शब्द मन घायल करे, शब्द बढाते मान ।।

शब्द मुँह से छूट गया, शब्द न वापस आय
शब्द जो हो प्यार भरा, शब्द ही मन मेँ समाएँ ।।

शब्द मेँ है भाव रंग का, शब्द है मान महान ।
शब्द जीवन रुप है, शब्द ही दुनिया जहान ।।

शब्द ही कटुता रोप देँ, शब्द ही बैर हटाएं ।
शब्द जोङ देँ टूटे मन, शब्द ही प्यार बढाएं ।।

Thursday, 1 February 2018

ZAKIR KHAN : TERI BEWAFAAI

Teri Bewafaai ke Angaaro mein lipti rahi hai Rooh meri,

Main iss tarah Aag na hota agar ho jaati tu meri…
Ekk saans se dehek jaata hai shola Dil ka,
Shaayad hawaaon mein faili hai Khushboo teri…