Saturday, 11 April 2015

शायद जिन्दगी इसी को कहते है........

दिल के टूटने पर भी हँसना,
शायद जिन्दादिली इसी को कहते हैं।
ठोकर लगने पर भी मंजिल के लिए भटकना,
शायद तलाश इसी को कहते हैं।
सूने खंडहर में भी बिना तेल के दिये जलाना,
शायद ऊम्मीद इसी को कहते हैं।
टूट कर चाहने पर भी उसे न पा सकना,
शायद चाहत इसी को कहते हैं।
गिरकर भी फिर से खडे हो जाना,
शायद हिम्मत इसी को कहते हैं।
उम्मीद, तलाश, चाहत, हिम्मत,
शायद जिन्दगी इसी को कहते है।

Saturday, 4 April 2015

इन होठों पे एक बात है ….

इन होठों पे एक बात है ….
पर उसके कुछ लफ्ज़
अब भी किसी के पास हैं….
ख्वाहिशों की डोर में बँधे हुए
कुछ लफ्ज़ जो मेरे पास है…
लफ्ज़ जो किसी के ख़यालों में खोए हैं …
लफ्ज़ जो किसी के आँखों के खाब में
सदियों से सोए नहीं है ….
मेरे लफ़ज़ो का एहसास उनको भी है….
समय की देहलीज़ पे ये राज़
मेरे साथ- साथ अब उनका भी है …

आज फिर तेरे सामने खड़ा एक फकीर

उस जैसा मोती पूरे समंद्र में नही है,
वो चीज़ माँग रहा हूँ जो मुक़्दर मे नही है,
किस्मत का लिखा तो मिल जाएगा मेरे ख़ुदा,
वो चीज़ अदा कर जो किस्मत में नही हैं...…

Wednesday, 1 April 2015

ग़लतियों से जुदा तू भी नही, मैं भी नही.....

गलतियों से जुदा
तू भी नही,
मैं भी नही,
दोनो इंसान हैं,
खुदा तू भी नही,
मैं भी नही ... !
तू मुझे ओर मैं तुझे
इल्ज़ाम देते हैं मगर,
अपने अंदर झाँकता
तू भी नही,
मैं भी नही ... !!
ग़लत फ़हमियों ने कर दी
दोनो मैं पैदा दूरियाँ,
वरना फितरत का बुरा
तू भी नही,
मैं भी नही...!!

ना खोया है कुछ, न कुछ पाया है ,.,

ना खोया है कुछ, न कुछ पाया है ,.,
एक शुन्य हूँ मै .,.,
जिसका कोई अस्तित्व ही नही है अकेले में.,
पर मुझे इस पर गम नही ,
क्यों ?
कि दुनिया का आधार हूँ .,.,
मै शुन्य हूँ .,. ©

मत करों नफरत कीसीको ईतनी की .....

मत करों नफरत कीसीको ईतनी की,
ये वक्त के फासलों पर आपको अफसोस हो जाये,
कल क्या पतां आप मिस करें और वो हमेंशा के मिस हो जायें.....

ये तन्हाइयां ......

ये तन्हाइयां ये रातो की खामोशिया
तेरी यादो को सात में लाती है
और जब जब मेरी रात तेरी यादो का साथ देती है
तब तब मेरी जीतेजी फिर मौत होती है..||